रघुनाथपुर स्टेशन के पश्चिम गुमटी पर ट्रेन हादसा हुआ है जी हां बिहार में जो यह ट्रेन हादसा हुआ है वहां की अभी तक अपडेट की खबरें बताते चले तो लोगों को तो यह पता है कि एक्सीडेंट हुआ लेकिन उनको किस तरीके से ग्रामीणों ने मदद किया यह भी हम देखेंगे तो पता चलता है कि उसे समय जिस समय ट्रेन हादसा हुआ था लगभग करीब 9:45 बज चुके थे यानी की देर रात हो चुकी थी और वहां की बाजार और दुकान बंद हो चुकी थी लेकिन जैसे ही दुर्घटना की खबरें मिली सभी को यह खबरें आपकी तरह चारों तरफ फैलने लगी थी तो वहां पर जो आसपास के लोगों को खबरें मिली तो 10 15 किलोमीटर दूर-दूर से लोग जिस साधन से बंद पड़ता उस भागते हुए आए मदद करने के लिए दुर्घटनाग्रस्त लोगों की
गांव के लोग वहां पर सैकड़ो की संख्या में पहुंच चुके थे और लोग मदद कर रहे थे और घायलों की आंखों में चमक दिखने लगी मदद की गुहार लगाते हुए लोगों को थोड़ा सा तसल्ली हुआ कि अब लोग मदद करने के लिए आ गए और उनकी जान में जान आई क्योंकि उसे समय क्या था कि लोग लोग खा पीकर आराम से सोने जा रहे थे और उन्हें जरा सा भी आशंका नहीं था इस दुर्घटना का और एक्सप्रेस अपने रफ्तार से पटरी पर दौड़ती जा रही थी लेकिन अचानक से कुछ झटका लगा और ट्रेन रुकने जैसी कुछ आसान का हुई और लोगों को कुछ दुर्घटना का आभास हुआ इतने में ही लोगों में अपराध अफ्रीका माहौल छा गया और लोग सिख पुकार लगने लगे क्योंकि यह जो ट्रेन एक्सीडेंट होता है वह आपको मौका नहीं देता है बचकर भागने का क्योंकि आप तो उसी में सवार होते हैं तो लोगों को जैसे ही पता चला की ट्रेन की दुर्घटना हुई है आपने अपनी जान बचाने लगे और जो ग्रामीण थे वह एक दूसरे की मदद करने लगे वहां पर पहुंचकर और मुख्यालय से प्रशासन की टीम लगभग घंटे भर बाद पहुंची तब तक की ग्रामीण उनकी मदद में जुट चुके थे और यात्रियों को ट्रेन के डब्बे से बाहर निकल रहे थे|
क्योंकि मैंने बताया कि वहां पर रात बहुत हो चुकी थी और जिस दुर्घटना स्थल पर दुर्घटना हुआ था वहां पर अंधेरा था और लोगों को मदद करने में परेशानी उत्पन्न हो रही थी क्योंकि अंधेरे के कारण जिसको मदद करनी है वहां पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था तभी ग्रामीणों ने जनरेटर लाकर रोशनी दिया और फिर मदद करने लगे
दुर्घटना स्थल पर कोई बच्चों को निकल रहा था ट्रेन की बोगी से तो कोई घायलों को ट्रेन की बोगी से निकल रहा था एक दूसरे के ऊपर जो गिरे हुए थे उनको हटाने की कोशिश कर रहे थे लोग कोई पानी लेकर दौड़ रहा था कोई घायलों को एंबुलेंस पर चढ़ा रहा था इसी प्रकार से ग्रामीण मदद कर रहे थे जितना बन पा रहा था वह लोग अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे थे लोगों की जान बचाने में लोगों की मदद करने में यहां पर ही इंसानियत और मानवता का एक बहुत ही अच्छा झलक देखने को मिल रहा था कि आज के कलयुग के जमाने में भी लोग इस तरीके से मदद कर सकते हैं यह दुर्घटना आने पर ही पता चलता है क्योंकि अगर 15 20 किलोमीटर दूर से लोग अपने बाइक अपने साइकिल से लोगों की मदद करने ना आते तो शायद बहुत लोगों को और भी जान माल के नुकसान उठाना पड़ता क्योंकि प्रशासन टीम थोड़ी देर बाद पहुंची थी उससे पहले ही ग्रामीण उनकी मदद करने जा पहुंच गए थे और उन्हें निकाल भी रहे थे ट्रेन की बोगी से|


