जयपुर के शास्त्री नगर की एक कहानी जो की हमारे समाज में लगता है कि हर घर की कहानी बनती नजर आ रही है

 जयपुर के शास्त्री नगर की एक कहानी है जो कि घर-घर की कहानी देखने को मिलती है ऐसा प्रतीत होता है और आजकल के दौड़ भाग की जिंदगी में और भी ज्यादा अपने काम को अहमियत देने लगे हैं और अपने बूढ़े बुजुर्गों को नजरअंदाज करने लगे हैं जयपुर के शास्त्री नगर की कहानी है और यह एक कहानी है इसमें पिता ने कोर्ट में केस दर्ज कराया है और अपने बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराया है कोर्ट में



पिता का कहना है कि उनके बेटे एक दो नहीं बल्कि चार-चार बेटे हैं और उन्होंने बहुत ही मेहनत मजदूरी से और बहुत ही मस्कट करके उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाया है और उसे काबिल बनाया चारों को कभी-कभी तो ऐसा भी होता होगा कि उनकी ख्वाहिश से पूरी करने के लिए उनकी  पॉकेट भी खाली होते होंगे फिर भी उनकी जरूरत को पूरा करते होंगे लेकिन आज भी इसी पिता ने शिकायत दर्ज कराया है


कि उनके चार बेटे में से चारों में कोई नहीं उनके देखभाल करता है और बल्कि उनकी जमा पूंजी की संपत्ति भी उन्होंने हड़प लिया है और नहीं अच्छे से खाना-पीना देता है और नहीं उनका ख्याल रखना है इस पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है और उनके चारों बेटे को कहा कि इनका एक वक्त का नाश्ता और दो वक्त की रोटी मिलनी चाहिए और बीमार होने पर इनका इलाज भी कराया जाना चाहिए इस पर बेटा ने कहा कि मुझे सब मंजूर है और मैं इनका सब चीज का देखभाल करूंगा लेकिन उनकी जो वृद्धा पेंशन मिलती है उसे यह दारू पीते हैं और फिर घर में क्लेश करते हैं इसी से मुझे आपत्ति है इस पर कोर्ट ने कहा पिता से कि आप दारु नहीं पियेंगे और घर में क्लेश बिल्कुल नहीं करेंगे और महीने के खर्च के लिए आपको ₹2000 यानी पांच ₹500 चारों बेटा मुहैया  कराएगा और पौष्टिक आहार के साथ-साथ इलाज की भी सुविधा आपको दी जाएगी|

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